About Me

My photo
The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Monday, May 25, 2009

सीलन

कई दिनों से ये घर मेरा
घुटा हुआ है
बंद दरवाज़ों के पीछे;
तुम आती थीं तो ख़ुद-ब-ख़ुद
खुल जाते थे दरवाज़े,
अब तो बस पड़े रहते हैं
दीवारों को सीलन के
हवाले किए हुए;
हाथ में कलम लिए
जब उतारने बैठता
हूँ दिल की बात,
पुर्ज़ों पर भी
इन दीवारों की सीलन ही
उतर आती है;
तेरी मुसी हुई
एक तस्वीर है मेरे पास,
जब देखना चाहता हूँ
एक दिया जला लेता हूँ,
फ़िर भी सब धुंधला
ही रहता है,
कुछ सीलन-सी बह आती है
आँखों में भी;

2 comments:

  1. Ghar bhi ek ajib si duniya hain ...
    kab koi iski dahlij se nikal kar chal deta hain
    bas inhi "silan" ki gawahi se pata chalta hain .

    kyak hub kaha hain ... ek nayi soch .

    ReplyDelete