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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Monday, May 25, 2009

सपनों की अँधेरी दुनिया

किसी दस्तक पर
आँख खुली थी.
खिड़की खोली
तो कमरे में
धूप बिखर आई.
आधी खुली खिड़की से
झाँक कर देखा:


कुछ दूर पर
एक सपेरा
बच्चो को लुभाता था;
साँप की माँ
कही भूकी पड़ी थी.


कही और
खिलौनों का समंदर
लहराता था;
बस कुछ ही खिलौने
साबत बचे थे.


एक बुढिया
घुटने देखती
चलती थी;
कमर पर
छाले पड़े थे.


खिड़की खोली
तो कमरे में
धूप बिखर आई;
समेट कर
बाहर गिरा दी.
सपनो की मेरी
अँधेरी दुनिया ही
भली थी.

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