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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, October 29, 2010

BUTTERFLY THOUGHTS



इस अँधेरी कोठरी के 
काले धुएँ मे
खोज रहा हूँ अपनी ग़ज़ल
जहां से पैदा हुईं ये रंग-बिरंगी तितलियाँ|


ओस की बूँद पे पाँव फिसला था,
टूटने से बचा रहा हूँ 
सीने मे रखा 
टूटा हुआ सामान|


जब प्यासे थे पुरज़े
तो सूखी थी कलम,
बह रही है अब ये अश्कों-सी 
तो पिरोने को धागा कहाँ,
बस अँधेरा है,
काला धूवां
और ये रंग-बिरंगी तितलियाँ|


चारों ओर से 
खुला आसमान भाग खड़ा हुआ,
अब चार हैं दीवारें,
एक बिस्तर,
दो बंद आँखें 
और है सिले होठों मे बंद
गीत मेरा| 


साहिलों ने लगायी इतनी चोटें,
कब तक बहता फिरता थका-हारा,
समुंदर की आस छिपाए अपने भीतर
सिमटा पड़ा है दरिया मेरा,
किसी अँधेरी कोठरी के 
काले धुएँ मे खोज रहा है रास्ता,
क्या पाया,
ये रंग-बिरंगी तितलियाँ|

Tuesday, October 26, 2010

RAZORBLADES



You think life would be so much better
If you were dealt a winning hand,
If you could walk across mighty oceans,
If you could lead your own band,
If you had wings of lightning,
If you could build real castles out of sand.

But now you sit and waste yourself,
Your tears fill up your idle time,
You hardly ever use your colors,
All you paint is black and white.

Free-falling into outer-space,
I clutched myself with both my hands,
Sitting up straight, pausing the stupidity,
I shed all the worms covering me.
My hands deserve holding an honest spade
Rather than a sickly razor blade.
Diamonds are born in a coal mine maybe awfully clichéd,
But you know we can shine on forever
If only we can think this way…




Wednesday, October 20, 2010

किराये के सपने

किराये के सपने उठाये फिरता रहा 
पलकों पर नहीं, कन्धों पर .
पीठ पर लादे-लादे ढ़ेरों वज़नी इरादे.
झुकी हुई पीठ और पस्त सोच,
कुढ़ता रहा जुस्तजू के बोझ तले हर रोज़.
किराये के सपने उठाये फिरता रहा.
मकान-मालिक बन बैठे ज़माने को
बाहर का रास्ता दिखाया
तो ख़ुली हवा बनकर बह आया ख़ालीपन 
और ख़ालीपन भरने आया सपनों का सैलाब,
सैलाब पिरो गया पलकों पर मीठे आँसुओं के मोती.
ये मोती बोझ नहीं, ज़ेवर हैं.
ये सपने किराये के नहीं, अपने हैं.
इस जुस्तजू मे भी तलब है,
अब इन इरादों की बात ही अलग है.

Sunday, October 17, 2010

THE KEY



If you can fool without feeling guilty all these probing eyes,
If you can come up every time with fitting alibis,
If you know your way around trampling feet,
If you can savor with equal ease the taste of defeat,
If you have smiling eyes with burning ears,
If you keep an account of all those bitter tears,
If you help a stranger in his time of need,
So he can someday feed the eternal fire of your greed,
If you find the color of blood the same as of water,
If you find silly whatever the Christ taught us,
You can come join the band,
If you are unfaithful,
Trust me, I’m your friend.

Thursday, October 14, 2010

फ़िर वही

वही पुराना गीत लिख ड़ाला आज फ़िर,
मिल गया कुछ इस में नया भी.


जाना होगा उस पार, कि राह खींच कर लिए जा रही है,
छोड़ जाऊंगा अपना एक हिस्सा यहाँ भी.


तुमने साथ निभाने का इरादा जो बनाया होता, मेरे यार,
साथ हो पाते हम आज फ़ना भी.


ऐसी ड़ोर बांधे जाना है जो कि कभी टूटे नहीं,
खिंचती रहेगी ये उम्र भर यहाँ भी, वहाँ भी.


आंसू भरी तेरी आँखों ने ये क्या मांग लिया बिछड़ते-बिछड़ते,
क्या कहूं, कि इजाज़त भी है और मना भी.


ढूंढ रहा हूँ तुझे पागलों की तरह,
और दिख रहा है तू मुझे हर जगह भी.


यादों ने साथ घर क्या कर लिया,
इकट्ठे भी हैं हम, ग़ज़ल, और तनहा भी.