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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, April 27, 2012

तेरे बिना



सुनी थी एक बार जो ग़ज़ल, गूँज रही है ज़हन में अब तक
कुछ नए बोल, छुप-छुप के पन्नो से, देखते ज़रूर हैं

इश्क का जाम पीकर अरसे से रूह प्यासी पड़ी है
बहती नदियों में कितनी ही दफा हम हाथ धोते ज़रूर हैं 

जान अटक जाती है बार-बार जा के तेरे घर की गली में
हम निकाल तो लाते हैं, फिर जियें किसके लिए, सोचते ज़रूर हैं

नींदें उड़ा के हमारी, तूने चाँद भी छुपा लिया
याद करके तुझे, रातों में अपनी, चांदनी घोलते ज़रूर हैं

चहरे तो तुझसे हसीं कई मिल जायेंगे इस भरे शहर में
तारे जलाकर आसमान में, तेरी रूह खोजते ज़रूर हैं

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