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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Thursday, February 14, 2013

बेख्याली

अब धडकनें ठोकर नहीं खाती बिखरी साँसों पर
कि दिल बह रहा है बेपरवाह बेख्याली के झोंकों पर


दिल की आह में भी न दर्द, न आवाज़ का निशान निकला
उम्मीद का आखरी फूल जब टूट के गिरा दुनियादारी के काँटों पर


न पहले प्यार, न आखरी अलविदा की याद के सबूत पाओगे
क्यों तहक़ीक़ की कैंचियाँ चलाते हो बुझी हुई बेजान नज़मो पर


जब बीच रास्ते से हाथ छुड़ा कर भाग गए तुम
तो खाख देखोगे मेरा रास्ता पहुँच के मंजिलों की ऊँचाइयों पर


वो नाम तो मुझे याद है, क़िस्सा मैं भूल गया
जो तुम चाहो तो आना कभी नमक छिड़कने मेरे भूले ज़ख्मों पर


थक गयी! सूख गयी! मर गयी, ग़ज़ल, वो नदी
जिसने सदियों की खुशहाली के सपने सींचे थे साहिलों पर

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