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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Monday, May 27, 2013

मेरे थे काग़ज़-कलम-शब्द, स्याही भी मेरी
ग़ज़ल, कविता, शायरी निकली तेरी बस तेरी

इस शहर से दूर आख़री आसमान तक जा मरे
फरिश्तों से भी जब बात निकली, तेरे पते पे आ ठहरी

थी कितनी ख़ुश-रँग रात वो, जिसके बाद
निकली हर सुबह यहाँ काली गहरी अंधेरी

ना छोड़ा उम्मीद का दामन, ना पत्थर-दिली का साथ
बेशर्मी की यार हद पार हुई, मेरी या तेरी

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