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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, July 19, 2013

यूँ जीते हो

जो पीता हूँ, तो क्यों पीते हो

जो जीता हूँ, तो यूँ जीते हो



अपनी शिक़ायतों की कैंचियों से

बात-बात पे होंठ मेरे सीते हो



नाज़ ख़ुद पे, जब क़ाबिलियत ग़ैर की

हम हारे हैं, तब तो तुम जीते हो



होगी हज़ार रंगों की शक्सियत तुम्हारी

हमारे सामने फिर भी ज़रा फ़ीके हो



रात-रात बार-बार का ये जलना क्या है

इंतज़ार करने के और भी तो तरीक़े हों


मुड़ के तुम भी तो देखो कभी इस तरफ

क्यों बार-बार ये ग़लती हम ही से हो

Tuesday, July 16, 2013

सहमी हुई सोच

घने अँधेरे में बढ़ते कालेपन की घुटन है।
इन बंद गुफ़ाओं की भूल-भुलैया में क़ैद पड़ी 
सीलती जा रही है सहमी हुई सोच। 
कुछ दफ़्न ख़्यालात नादानी में जाग पड़ते हैं कभी,
जोश में टकराते हैं तो चिंगारी-सी भी भड़क उठती है।
उस एक पल के बे-तर्तीब उजाले में साफ़ हुआ कि 
यहाँ दीवारों पे अब भी वही पुरानी तस्वीरें लटकी हैं,
नया कुछ है तो उन पे चढ़ती धूल की नई परत।
उलझी राहों में उलझी पीढ़ी
हर बढ़ता कदम पीछे खींच लेती है,
मानो हार के ड़र से 
हार मान बैठी हो।

Friday, July 12, 2013

झुके हों तारे सारे

झुके हों तारे सारे कदमो मे तुम्हारे, कम है
हमे इसका भी ग़म नहीं कि इतने ग़म हैं

ना ख़ुदी की ख़बर है, ना ख़ुशहाली का ख़्याल
इबादत उस बुत की जो मन मे हर दम है

मय के प्यालों से छलकता पाया हम ने तुम को
आसमान से बरस्ते बेशुमार तुम पे हम हैं

जिस बात को ज़ुबान से बताया नहीं जा सकता
उस की स्याही से इन पुर्ज़ो की आँखें नम हैं

वादों के पीछे इरादा सच्चा समझना भूल मेरि
कुरेदे से मिलेगा भरोसा पक्का अब भी, तेरा भरम है

दिल वफा ईमान मोहब्बत दोस्ती, दग़ाबाज़ सब
ख्वाईशें दर्द रंज ग़ज़ल साथ कदम कदम हैं