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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, July 19, 2013

यूँ जीते हो

जो पीता हूँ, तो क्यों पीते हो

जो जीता हूँ, तो यूँ जीते हो



अपनी शिक़ायतों की कैंचियों से

बात-बात पे होंठ मेरे सीते हो



नाज़ ख़ुद पे, जब क़ाबिलियत ग़ैर की

हम हारे हैं, तब तो तुम जीते हो



होगी हज़ार रंगों की शक्सियत तुम्हारी

हमारे सामने फिर भी ज़रा फ़ीके हो



रात-रात बार-बार का ये जलना क्या है

इंतज़ार करने के और भी तो तरीक़े हों


मुड़ के तुम भी तो देखो कभी इस तरफ

क्यों बार-बार ये ग़लती हम ही से हो

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