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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Sunday, August 25, 2013

शौक़

मेरी डायरी के पन्ने
ऊब गए हैं 
ख़ाली पड़े पड़े.
कहते हैं,
कुछ तो बात हो 
ख़्यालों से.
मुझे आते-जाते देख 
ताकते हैं ऐसे 
जैसे मुरझा जायेंगे 
बिना स्याही की नमी के.
इन्हें बताऊँ तो कैसे,
अपने शौक़ 
बदल रहा हूँ.

LOST WITHIN




High above in my den
There’s a man.
Has his teeth and his hair
Spoilt by ages of despair.
Finds it hard to really care
About all that he loves,
A love so rare.

So you must share his pain,
But you know there’s no way.
But again,
You’ve seen him flail
His color-flutter ideas
About what he sees when he’s insane.

How he jumps from wrong to right
And makes it without a fright!
How you tie him tight!
And despite,
He digs his way out right through the night,
All the way up to the sky!

Find your heart following him
For every path is his.
He knows so many roads
That he’s lost within.
He’s seen so much
Everything seems unseen.

If ever he picks a way,
Shun, turn and run.
If there’s another way,
That’s the only one
Or everything must come undone.

Sunday, August 4, 2013

निकला है जो दिल से

बह के निकला है जो दिल से, उसे समेट के तू रखना अपने पास
बिखेर देना हवा मे जब आसमान मे तारे ना हों किसी रात

क्या पता, है ये तेरी हंसी की आहट या सोती आँखों का जागना
बरस पड़ते हैं बादल हड़बड़ा के जब याद तेरी कर देती है उदास

ये नहीं कि तेरे जाने का ग़म है या लौट आने का इंतज़ार, बस
अधूरा मेहसूस करता हूँ तो हो जाता है तेरे ना होने का एहसास

कहाँ कभी लोगों की इस भीड़ से दूर भागता हूँ मैं, ये है कि
तेरी ग़ैर-मौजूदगी मे जो तुझसे बात होती है, बस यही है अब ख़ास

जो चाहा, हमेशा खुल के तो कह ही दिया था दस-दस बार
तेरी तरफ ख़्याल खींच ले जाए, मन मे रह गयी ऐसी कोन सी बात?