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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Sunday, August 4, 2013

निकला है जो दिल से

बह के निकला है जो दिल से, उसे समेट के तू रखना अपने पास
बिखेर देना हवा मे जब आसमान मे तारे ना हों किसी रात

क्या पता, है ये तेरी हंसी की आहट या सोती आँखों का जागना
बरस पड़ते हैं बादल हड़बड़ा के जब याद तेरी कर देती है उदास

ये नहीं कि तेरे जाने का ग़म है या लौट आने का इंतज़ार, बस
अधूरा मेहसूस करता हूँ तो हो जाता है तेरे ना होने का एहसास

कहाँ कभी लोगों की इस भीड़ से दूर भागता हूँ मैं, ये है कि
तेरी ग़ैर-मौजूदगी मे जो तुझसे बात होती है, बस यही है अब ख़ास

जो चाहा, हमेशा खुल के तो कह ही दिया था दस-दस बार
तेरी तरफ ख़्याल खींच ले जाए, मन मे रह गयी ऐसी कोन सी बात?

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