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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, August 1, 2014

मसीहा कहाँ है

आग की जलन तो है, रौशनी देने वाला दिया कहाँ है
शैतान तो यहाँ हर जगह है, तुम्हारा वो मसीहा कहाँ है

चल रहा है ज़हन मे वही एक मंज़र बार-बार
तब से अब तक बीति सारी सदियाँ कहाँ हैं

क्यों रह जाती हैं दिल में धड़कनें चुभने को
सारी उम्मीदें ख़त्म करने वाली तबाहियाँ कहाँ हैं

सज़ा तो ज़रूरत से ज़्यादा मेरे नाम तोल दी तुम ने
लाओ मेरा जुर्म भी, मैंने पूरा किया कहाँ है

बढ़ने दो ये धुंवा, खिड़कियाँ मत खोलो
खोलनी पड़े आँखें, अभी इतनी सियाह कहाँ है

बैठा है ऊंची मीनार मे मग़रूर एहसान कर के
दरवाज़े पे खड़ा तेरा क़ैदी सोच रिहा कहाँ है

छिला है गला बार-बार तेरा नाम पुकारे से
देना था जो पैग़ाम वो अभी दिया कहाँ है

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