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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Friday, May 29, 2015

(135)



धुंध-सी है कुछ-
क्या बीता है ऐसा जो मौसम यूं मुंह छुपा रहा है?
हवा भी संभले झोंकों मे चल रही है,
सारी वादी भीगी पड़ी है ठंडी ओस मे
मानो रात भर चुपके से पानी बरसा हो,
फूल-पत्ते ऐसे सहमे पड़े हैं जैसे किसी भयानक सपने से आँख खुली हो,
पंछी कोनों मे दुबके देख रहे हैं-
ज़ाहिर है कोई वहम सता रहा है उन्हे,
मेरी चाय भी कप में रखी-रखी ठंडी हो गयी,
बड़ी बे-मन आई है ये सुबह।

Monday, May 25, 2015

(134)


उधेड़ रहा हूँ हर धागा
जिससे तू ने सी-सी के मुझे मेरे अंदर बांधा था,
खुले धागों के इस उलझे जंगल में
रौशनी छन के अंधेरा बनती है
अंधेरा घुल के रौशनी बनता है ,
सारे खुले सिरे मन के अकेले पड़े रहते हैं मायूस
जितने साथ थे सारे छूटते चले जाते हैं,
कहाँ चले जाते हैं?

भीतर धधक के उठती धड़कन अब बेझिजक बढ़ता बवंडर है
जो मुझे वक़्त के कभी इस पार, कभी उस पार घसीटता ले जा रहा है,
इस तूफ़ान की तेज़ हवा में कहीं क्यों साँस नहीं मिलती
चारों ओर बहती यादों की लाशों में कोई आस नहीं मिलती
उधड़े, बिखरे बरबादी के शोर में हलकी सी भी आवाज़ नहीं मिलती,

जो मिला वो छूट रहा है हाथ से
गिर के कतरा-कतरा घुट रहा है खाख में
बहते आँसुओं की तरह
और इस बहती नदी में बहे जाना है
बिना डूबे, बिना उभरे सहे जाना है।

Sunday, May 24, 2015

(133)

Hold that thought
Rest your breath

Free at last
Visions drained
Noises walled in
Forces unbalanced

Fall back into waves, cushions
Of dreams unsown and strewn
Let your mind drag you down whirlpools
And into the vacuum of space
That’s made of nothing but colors and tastes

Ease into a world of no density
Look around but don’t lose your bearings
Sleep a while but don’t worry
Here you'll never miss a thing
Let the accumulation of moments begin
We can live them later
Experience instant gratification
Suspend all animation
Float into the crevices of your consciousness
Turn away from everything else

Meet your Self



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