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The Madman, "Yes, three days, three centuries, three aeons. Strange they would always weigh and measure. It is always a sundial and a pair of scales."

Saturday, February 13, 2016

(164)



अँधेरे खंगालने हैं, खोट निकालने हैं
दश्त का दूर से दीदार बहुत हुआ
अब उस पागलपन में डूबना है
पाप की राक्षसी घुट भरनी है
दिल के आखरी कोने से ऐसी चीख निकली है
कि उजाले की सफ़ेद चादर फट गयी है
जगत का काला चहरा साफ़ हुआ है
भद्दा मज़ाक़ हुआ है, इंसाफ़ हुआ है
आज अपने अंत का एहसास हुआ है
अब न सलाम चाहिए न दुआ चाहिए
दर्द की आस लगी है
पत्थरों की मार चाहिए
अपने बुज़दिल दरवाजों के पीछे छुपना मुझे देख के
मैंने आत्मा उघाड़ दी है, उसके दाग़ बिखर रहे हैं
नींद की ठंडी चाल बिगाड़ दी है
अब सूरज सा जगना है, प्रचण्ड अग्नि में जलना है
बेझिझक सर्वनाश की तरफ बढ़ रहा हूँ
मैं काल हूँ, अपने आप का विनाश कर रहा हूँ

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